प्रदोष व्रत, तिथि, पूजा- विधि और महत्व | पौराणिक कथा

वैदिक पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। वहीं आपको बता दें कि हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं। वहीं मान्यता है कि जो लोग व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएंं पूण होती हैं। वहीं इस व्रत के प्रभाव से सुहागिनों को अखंड सौभाग्यवती का वरदान, संतान संबंधी परेशानी दूर होती है। वहीं मार्च का अंतिम प्रदोष व्रत 19 मार्च को रखा जाएगा। इस बार प्रदोष व्रत रविवार को है तो इसे रवि प्रदोष कहा जाएगा। आइए जानते तिथि, पूजा-विधि और महत्व…

प्रदोष व्रत तिथि (Pradosh Vrat Tithi)

प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि 

प्रदोष व्रत का शुभ मुहुर्त (Pradosh Vrat Shubh Muhurat)

शास्त्रों में भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम माना गया है। वहीं 19 मार्च को प्रदोष काल 6 बजकर 34 से 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा- अर्चना की जा सकती है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठे और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर गंगा जल से शुद्ध करें। वहीं गंगा जल, शहद,दूध और दही से शिव का अभिषेक करें। भगवान शिव को अक्षत, धूप, दीप और फूल अर्पित करें और मीठे और फल का भोग लगाएं। फिर शमी के पत्ते, बेलपत्र, रुद्राक्ष आदि चढ़ाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाकर प्रदोष व्रत की कथा पढें। साथ ही अंत में भगवान शिव की आरती जरुर करें। फिर भगवान को भोग लगाकर सभी को प्रसाद बांट दें। वहीं जो लोग बीमार रहते हैं हो वो लोग महामृत्युंय मंत्र का जाप करें.

प्रदोष व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं :
 
1. प्रदोष काल में उपवास में सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योंकि हरा मूंग पृथ्‍वी तत्व है और मंदाग्नि को शांत रखता है।
 
2. प्रदोष व्रत में लाल मिर्च, अन्न, चावल और सादा नमक नहीं खाना चाहिए। हालांकि आप पूर्ण उपवास या फलाहार भी कर सकते हैं।

शिवजी की कृपा पाने के लिए करें प्रदोष व्रत


प्राचीनकाल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था। उस पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पुत्र को साथ लेकर भीख मांगती हुई शाम तक घर वापस आती थी।

एक दिन उसकी मुलाकात विदर्भ देश के राजकुमार से हुई, जो कि अपने पिता की मृत्यु के बाद दर-दर भटकने लगा था। उसकी यह हालत पुजारी की पत्नी से देखी नहीं गई, वह उस राजकुमार को अपने साथ अपने घर ले आई और पुत्र जैसा रखने लगी।
 
एक दिन पुजारी की पत्नी अपने साथ दोनों पुत्रों को शांडिल्य ऋषि के आश्रम ले गई। वहां उसने ऋषि से शिव जी के प्रदोष व्रत की कथा एवं विधि सुनी तथा घर जाकर अब वह भी प्रदोष व्रत करने लगी। 
 
एक बार दोनों बालक वन में घूम रहे थे। उनमें से पुजारी का बेटा तो घर लौट गया, परंतु राजकुमार वन में ही रह गया। उस राजकुमार ने गंधर्व कन्याओं को क्रीड़ा करते हुए देखा तो उनसे बात करने लगा। उस कन्या का नाम अंशुमती था। उस दिन वह राजकुमार घर देरी से लौटा।
राजकुमार दूसरे दिन फिर से उसी जगह पहुंचा, जहां अंशुमती अपने माता-पिता से बात कर रही थी। तभी अंशुमती के माता-पिता ने उस राजकुमार को पहचान लिया तथा उससे कहा कि आप तो विदर्भ नगर के राजकुमार हो ना, आपका नाम धर्मगुप्त है। 
 
अंशुमती के माता-पिता को वह राजकुमार पसंद आया और उन्होंने कहा कि शिवजी की कृपा से हम अपनी पुत्री का विवाह आपसे करना चाहते है, क्या आप इस विवाह के लिए तैयार हैं?
 
राजकुमार ने अपनी स्वीकृति दे दी तो उन दोनों का विवाह संपन्न हुआ। बाद में राजकुमार ने गंधर्व की विशाल सेना के साथ विदर्भ पर हमला किया और घमासान युद्ध कर विजय प्राप्त की तथा पत्नी के साथ राज्य करने लगा। वहां उस महल में वह पुजारी की पत्नी और पुत्र को आदर के साथ ले आया तथा साथ रखने लगा। पुजारी की पत्नी तथा पुत्र के सभी दुःख व दरिद्रता दूर हो गई और वे सुख से अपना जीवन व्यतीत करने लगे।
 
एक दिन अंशुमती ने राजकुमार से इन सभी बातों के पीछे का कारण और रहस्य पूछा, तब राजकुमार ने अंशुमती को अपने जीवन की पूरी बात बताई और साथ ही प्रदोष व्रत का महत्व और व्रत से प्राप्त फल से भी अवगत कराया।
 
उसी दिन से प्रदोष व्रत की प्रतिष्ठा व महत्व बढ़ गया तथा मान्यतानुसार लोग यह व्रत करने लगे। कई जगहों पर अपनी श्रद्धा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों ही यह व्रत करते हैं। इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी कष्ट और पाप नष्ट होते हैं एवं मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति होती है।

पूजन सामग्री :-

  • धूप
  • दीप
  • घी
  • सफेद पुष्प
  • सफेद फूलों की माला
  • आंकड़े का फूल
  • सफेद मिठाइयां
  • सफेद चंदन
  • सफेद वस्त्र
  • जल से भरा हुआ कलश
  • कपूर
  • आरती के लिये थाली
  • बेल-पत्र
  • धतुरा
  • भांग
  • हवन सामग्री
  • आम की लकड़ी
वार अनुसार प्रदोष व्रत फल (Types & Benefits of Pradosh Vrat)

अलग- अलग वारों के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ भी अलग-अलग होते हैं आइए जानते हैं किस तरह दिन के अनुसार व्रत का फल..

सोम प्रदोष- सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर होने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है। इंसान की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

भौम प्रदोष- मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत कहलाता है। उस दिन के व्रत को करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।

बुध प्रदोष – बुधवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत आपकी सभी कामनाओं की पूर्ति करता है।

गुरु प्रदोष – गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इस दिन के व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है।

शुक्र प्रदोष- शुक्रवार के दिन वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य प्रदान करता है। इस व्रत को करने से दाम्पत्य जीवन में सुख-शान्ति बनी रहती है।

शनि प्रदोषसंतान प्राप्ति के लिए शनिवार को होने वाला प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए।

रवि प्रदोष- रविवार के दिन होने वाले प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि मिलती है। 

2021 में प्रदोष व्रत कब है? (Pradosh Vrat Date And Muhurat Panchang / Calendar)

Pradosh Vrat Date And Muhurat Panchang / Calendar

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